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झींगुर और चीटियां | Hindi Story

jokes-junction-story-5गर्मियों के दिन थे । एक झींगुर पेड़ के तने से टिका बैठे गुनगुना रहा था । वही नीचे खेत में हजारों लाखों छोटी-छोटी चीटियां थी, जो गेहूं के दाने उठा-उठाकर अपने बिलों मैं ले जा रही थी । ‘बेचारी चीटियां ।’ झींगुर ने सोचा , ‘जब देखो काम में जुटी रहती है। जानती ही नहीं कि जिंदगी के मजे कैसे लिए जाते हैं । बात आ गई हो गई… गर्मियां खत्म हुई और सर्दी के दिन आ गए झींगुर के पास खाने को कुछ भी नहीं था ।नौबत भूखे मरने की आ गई उसकी डैनी डैनी दयनीय हालत देख चीटियों को दया आ गई और उन्होंने उसे खाने को दिया उनके पास अनाज की कमी नहीं थी आड़े वक्त के लिए बचाकर जो रखा था ,इसीलिए हर समय काम करती रहती थी। अब झींगुर का मैदान का महत्व का आभास हो गया था।