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jaako raakhe saiyan mar sake na koi

Jaako raakhe saiyan mar sake na koi

दोस्तों हम हाज़िर हैं एक और दादी माँ की कहानी के साथ बहुत पहले की बात है मैं अपनी दादी के साथ मेला देखने जा रहा था , हम बस से सफर कर रहे थे .
बस अपनी मंजिल की ओर बढ़ी जा रही थी। रास्ते में कुछ देर के लिए रुकी तो ड्राइवर ने यात्रियों से कहा, ‘‘जो लोग चाय-नाश्ता करना चाहें यहीं कर सकते हैं। अगला पड़ाव दो घंटे बाद आएगा।’

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तो यह सुनकर बस में बैठे यात्रियों में से कुछ यात्री उतर गये,मैं भी अपनी दादी के साथ नीचे उतर गया तभी हमने  देखा कि एक कुत्ता खरगोश के पीछे दौड़ रहा है। खरगोश तेजी से कूदकर एक झाड़ी में छिप गया। तभी बस का चालक उठा और झाड़ियों के पास जाकर एक ही झटके में खरगोश को पकड़ लिया। वह बस में से एक बड़ा चाकू ले आया।
‘कुत्ते से तो बच गया, मुझसे कैसे बचेगा।’ चालक बोला।
‘पर आप इसे मार क्यों रहे हैं ?’ एक यात्री बोला।




‘मैं इसे भूनकर खाऊँगा। बड़े दिनों बाद खरगोश का मांस खाने को मिलेगा।’
अभी चालक ने अपना बड़ा-सा चाकू खरगोश की गर्दन पर चलाने के लिए उठाया है था कि चाकू उसके हाथ से छूट कर उसके पैर पर गिर पड़ा। भारी चाकू के गिरते ही चालक का पैर बुरी तरह कट गया। वहाँ नजदीक कोई अस्पताल भी नहीं था। खून अधिक निकल जाने के कारण उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। कुछ ही देर में चालक के प्राण निकल गए।
तभी तो कहा गया है, ‘जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय।’
जीव हत्या से बढ़कर पाप कोई दूसरा नहीं। प्राण सभी को प्यारे होते हैं, तभी वह खरगोश कुत्ते से बचने को झाड़ी में जा छिपा था, लेकिन बस का ड्राइवर उसके प्राणों का प्यासा हो गया। ईश्वर की लीला अपरंपार है, इसलिए अहित सोचने वाले का अहित पहले होता है, जैसे बस ड्राइवर का हुआ।

कहानी से सन्देश  : दोस्तों हमे सभी बेजुबाँ जानवरों से प्यार करना चाहिए . वो बेचारे अपनी तकलीफ हमें बता नहीं पाते तो हमें लगता है उन्हें पीड़ा नहीं होती .